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जानकी स्तुति || Janaki Stuti || Janaki Ki Stuti
माँ सीता जी को जानकी के नाम से भी जाना जाता हैं ! माँ श्री सीता माता जी की पूजा अर्चना में श्री जानकी स्तुति का पाठ किया जाता हैं ! Shri Janaki Stuti आदि के बारे में बताने जा रहे हैं !! जय श्री सीताराम !! जय श्री हनुमान !! जय श्री दुर्गा माँ !! यदि आप अपनी कुंडली दिखा कर परामर्श लेना चाहते हो तो या किसी समस्या से निजात पाना चाहते हो तो कॉल करके या नीचे दिए लाइव चैट ( Live Chat ) से चैट करे साथ ही साथ यदि आप जन्मकुंडली, वर्षफल, या लाल किताब कुंडली भी बनवाने हेतु भी सम्पर्क करें : 9667189678 Shri Janaki Stuti By Online Specialist Astrologer Sri Hanuman Bhakt Acharya Pandit Lalit Trivedi.
जानकी स्तुति || Janaki Stuti || Janaki Ji Ki Stuti
भई प्रगट कुमारी भूमि-विदारी जन हितकारी भयहार ी ।
अतुलित छबि भारी मुनि-मनहारी जनकदुलारी सुकुमारी ॥
सुन्दर सिंहासन तेहिं पर आसन कोटि हुताशन द्युतिकारी ।
सिर छत्र बिराजै सखि संग भ्राजै निज-निज कारज करधारी ॥
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सुर सिद्ध सुजाना हनै निशाना चढ़े बिमाना समुदाई ।
बरषहिं बहुफूला मंगल मूला अनुकूला सिय गुन गाई ॥
देखहिं सब ठाढ़े लोचन गाढ़े सुख बाढे उर अधिकाई ।
अस्तुति मुनि करहीं आनन्द भरहीं पायन्ह परहीं हरषाई ॥
ऋषि नारद आये नाम सुनाये सुनि सुख पाये नृप ज्ञानी ।
सीता अस नामा पूरन कामा सब सुखधामा गुन खानी ॥
सिय सन मुनिराई विनय सुनाई समय सुहाई मृदुबानी ॥
लालनि तन लीजै चरित सुकीजै यह सुख दीजै नृपरानी ॥
सुनि मुनिवर बानी सिय मुसकानी लीला ठानी सुखदाई ।
सोवत जनु जागीं रोवन लागीं नृप बड़भागी उर लाई ॥
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दम्पति अनुरागेउ प्रेम सुपागेउ यह सुख लायउँ मनलाई ।
अस्तुति सिय केरी प्रेमलतेरी बरनि सुचेरी सिर नाई ॥
दो०–निज इच्छा मखभूमि ते प्रगट भई सिय आय ॥
चरित किये पावन परम बरधन मोद निकाय ॥
॥ श्रीजनकनन्दिनीकी जय ॥
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