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उमा महेश्वर व्रत कथा || Uma Maheshwar Vrat Katha || Uma Maheshwara Katha

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उमा महेश्वर व्रत कथा || Uma Maheshwar Vrat Katha || Uma Maheshwara Katha

उमा महेश्वर व्रत कब हैं ? || Uma Maheshwar Vrat Kab Hai ?

उमा महेश्वर व्रत भाद्रपद मास (भादों) की शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि के दिन की जाती हैं। इस साल 2021 यह 20 सितम्बर, वार सोमवार के दिन मनाई जाएगी। हिन्दू मान्यताओं के अनुसार उमा महेश्वर व्रत करने से जातक को भगवान शिव और पार्वती माता की कृपा प्राप्त होती हैं।

उमा महेश्वर व्रत कथा || Uma Maheshwar Vrat Katha || Uma Maheshwara Katha

मत्स्य पुराण में उमा महेश्वर व्रत का उल्लेख किया गया हैं। मत्स्य पुराण में उल्लिखित कथा के अनुसार एक बार कैलाश पर्वत से भगवान शंकर के दर्शन करके लौटते समय मार्ग में महर्षि दुर्वासा की भेंट भगवान विष्णु से हुई। महर्षि दुर्वासा को भगवान शंकर ने आशीर्वाद स्वरूप एक बिल्वपत्र की माला प्रदान की थी। जब महर्षि दुर्वासा की भेंट भगवान विष्णु से हुई तो उन्होने वो माला विष्णु जी को दे दी। भगवान विष्णु ने महर्षि दुर्वासा से मिली उस माला को स्वयं अपने गले में धारण ना करके गरूण जी के गले में पहना दिया। यह देखकर महर्षि दुर्वासा को क्रोध आ गया। और उन्होने क्रोध में आकर भगवान विष्णु से कहा कि तुमने मेरे आराध्य भगवान शंकर का अपमान किया हैं। Uma Maheshwar Vrat Katha

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उनके द्वारा दी गई माला मैंने तुम्हे उपहार स्वरूप दी और तुमने वो माला स्वयं धारण ना करके अपने गरूण को पहना दी। यह मेरा और मेरे भगवान शंकर का घोर अपमान हैं। इसलिये मैं तुम्हे श्राप देता हूँ की तुम्हारा सारा वैभव नष्ट हो जायेगा। तुम श्रीहीन हो जाओगे, लक्ष्मी तुम्हारे पास से चली जायेगी, क्षीरसागर भी तुमसे छीन जायेगा और तुम्हारा शेषनाग भी तुम्हारी मदद नही का पायेगा। महर्षि दुर्वासा से ऐसा श्राप सुनकर भगवान विष्णु ने उस श्राप को स्वीकर किया और फिर बड़े शांत स्वर में उन्होने महर्षि दुर्वासा से उस श्राप के निवारण का उपाय पूछा। तब महर्षि दुर्वासा ने भगवान विष्णु को उमा महेश्वर व्रत करने का परामर्श दिया। Uma Maheshwar Vrat Katha

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महर्षि दुर्वासा ने कहा कि उमा महेश्वर व्रत के करने से मेरे श्राप के कारण तुम जो कुछ भी खोओगें वो सब तुम्हे पुन: प्राप्त हो जायेगा। तब भगवान विष्णुजी ने भाद्रपद माह की पूर्णिमा पर उमा महेश्वर व्रत का अनुष्ठान किया। इस व्रत के प्रभाव से महर्षि दुर्वासा के दिये श्राप का निवारण हुआ और लक्ष्मी के साथ-साथ उन्होने जो भी वस्तुये खोई थी उन्हे वो सब पुन: प्राप्त हो गई। Uma Maheshwar Vrat Katha

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