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बाबा रामदेव की कथा || Baba Ramdev Ki Katha || Baba Ramdev Jayanti Katha

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बाबा रामदेव की कथा || Baba Ramdev Ki Katha || Baba Ramdev Jayanti Katha

बाबा रामदेव जयंती कब हैं ? 2021 || Baba Ramdev Jayanti Kab Hai ? 2021

इस साल 2021 में बाबा रामदेव जयंती 16 सितम्बर, वार गुरुवार के दिन मनाई जाएगी ! 

बाबा रामदेव की कथा || Baba Ramdev Ki Katha || Baba Ramdev Jayanti Katha

राजा अजमल जी द्वारकानाथ के परमभक्त होते हुए भी उनको दु:ख था कि इस तंवर कुल की रोशनी के लिये कोई पुत्र नहीं था। दूसरा दु:ख था कि उनके ही राजरू में पड़ने वाले पोकरण से 3 मील उत्तर दिशा में भैरव राक्षस ने परेशान कर रखा था । इस कारण राजा रानी हमेशा उदास ही रहते थे । Baba Ramdev Ki Katha

सन्तान ही माता-पिता के जीवन का सुख है । राजा अजमल जी पुत्र प्राप्ति के लिये दान पुण्य करते, साधू सन्तों को भोजन कराते, यज्ञ कराते, नित्य ही द्वारकानाथ की पूजा करते थे । इस प्रकार राजा अजमल जी भैरव राक्षस को मारने का उपाय सोचते हुए द्वारका जी पहुंचे । जहां अजमल जी को भगवान के साक्षात दर्शन हुए, राजा के आखों में आंसू देखकर भगवान में अपने पिताम्बर से आंसू पोछकर कहा, हे भक्तराज रो मत मैं तुम्हारा सारा दु:ख जानता हूँ । मैं तेरी भक्ती देखकर बहुत प्रसन्न हूँ, माँगो क्या चाहिये तुम्हें मैं तेरी हर इच्छायें पूर्ण करूँगा ।

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भगवान की असीम कृपा से प्रसन्न होकर बोले हे प्रभु अगर आप मेरी भक्ती से प्रसन्न हैं तो मुझे आपके समान पुत्र चाहिये याने आपको मेरे घर पुत्र बनकर आना पड़ेगा और राक्षस को मारकर धर्म की स्थापना करनी पड़ेगी । तब भगवान द्वारकानाथ ने कहा- हे भक्त! जाओ मैं तुम्हे वचन देता हूँ कि पहले तेरे पुत्र विरमदेव होगा तब अजमल जी बोले हे भगवान एक पुत्र का क्या छोटा और क्या बड़ा तो भगवान ने कहा- दूसरा मैं स्वयं आपके घर आउंगा । अजमल जी बोले हे प्रभू आप मेरे घर आओगे तो हमें क्या मालूम पड़ेगा कि भगवान मेरे धर पधारे हैं, तो द्वारकानाथ ने कहा कि जिस रात मैं घर पर आउंगा उस रात आपके राज्य के जितने भी मंदिर है उसमें अपने आप घंटियां बजने लग जायेगी,महल में जो भी पानी होगा (रसोईघर में) वह दूध बन जाएगा तथा मुख्य द्वार से जन्म स्थान तक कुमकुम के पैर नजर आयेंगे वह मेरी आकाशवाणी भी सुनाई देगी और में अवतार के नाम से प्रसिद्ध हो जाउँगा । Baba Ramdev Ki Katha

श्री रामदेव जी का जन्म संवत् 1409 में भाद्र मास की दूज को राजा अजमल जी के घर हुआ । उस समय सभी मंदिरों में घंटियां बजने लगीं, तेज प्रकाश से सारा नगर जगमगाने लगा । महल में जितना भी पानी था वह दूध में बदल गया, महल के मुख्य द्वार से लेकर पालने तक कुम कुम के पैरों के पदचिन्ह बन गए, महल के मंदिर में रखा संख स्वत: बज उठा । उसी समय राजा अजमल जी को भगवान द्वारकानाथ के दिये हुए वचन याद आये और एक बार पुन: द्वारकानाथ की जय बोली । इस प्रकार ने द्वारकानाथ ने राजा अजमल जी के घर अवतार लिया ।

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बाबा रामदेव के रामासा पीर बनने की कहानी

बाबा रामदेव मुस्लिम भक्तों में रामासा पीर के नाम से प्रसिद्ध है। बाबा रामदेव के रामासा पीर बनने की कहानी भी बड़ी रोचक है। जब बाबा रामदेव के चमत्कारों के किस्से मक्का तक पहुंचे तो वहां से पांच पीर उनकी परीक्षा लेने राजस्थान आए। पीरों के पहुंचने पर बाबा रामदेव ने उनको खाना खिलाने के लिये आदर सत्कार से बैठाया। जैसे ही खाना डालने लगे तो एक पीर ने कहा कि वो अपना कटोरा मक्का में भूल आए हैं और उसके बिना हम भोजन नहीं कर सकते। रामदेव बाबा ने कहा ठीक है आपको भोजन आपके कोटोरों में ही खिलाया जाएगा। ऐसा कहते ही बाबा ने वहां सभी के कटोरे प्रकट कर दिये। चमत्कार को देख कर सभी पीर उनके आगे नतमस्तक हो गए। पांच पीरों ने बाबा को पीर की उपाधि दी।

रामदेव जी की समाधि

रामदेव जी ने 37 वर्ष की आयु में वीएस 1442 में भाद्रपद शुक्ल एकादशी पर राजस्थान के रामदेवरा पोखरण से 10 किलोमीटर पर समाधि ली। दलीबाई मेघवाल समुदाय के उनके अनुयाई हैं। उन्हें भी उनकी कब्र के पास दफनाया गया और कहा जाता है कि उन्होंने रामदेव से 2 दिन पहले समाधि ली थी।

इस मंदिर परिसर में डाली बाई और उनके कुछ अन्य प्रमुख शिष्यों की तरह उनके शिष्यों की भी समाधि बनी हुई है। इस परिसर में 5 मुस्लिम पीरों की कब्र भी है, जो मक्का से आए थे। इसमें एक सोतेला कुआं भी है, जिसके जल के बारे में श्रद्धालुओं का मानना है कि इसमें चिकित्सा शक्तियां हैं। Baba Ramdev Ki Katha

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बाबा रामदेव जी का विशाल मंदिर जैसलमेर के रुणिचा में फैला हुआ है, जहां दूर-दूर से श्रद्धालु ने नमन करने आते हैं। रामदेव जी सामुदायिक सद्भाव और अमन के प्रतीक हैं। बाबा का अवतरण विक्रम संवत 1409 को भाद्रपद शुक्ल दूज के दिन तोमर वंश राजपूत और रुणिचा के शासक अजमल जी के घर हुआ। उनकी माता का नाम मीणादे मीनल देवी था।

बाबा का संबंध राजवंश से था, लेकिन उन्होंने पूरा जीवन शोषित गरीब और पिछड़े लोगों के बीच बिताया। उन्होंने रूढ़ियों और छुआछूत का विरोध किया। भक्तों उन्हें प्यार से रामसा पीर या रामापीर भी कहते हैं। बाबा को श्रीकृष्ण का अवतार मानते हैं। वे हिंदू-मुस्लिम एकता के प्रतीक माने जाते हैं । भक्तों का उनके प्रति समर्पण इतना है, कि पाकिस्तान से मुस्लिम भक्त भी उन्हें नमन करने भारत आते हैं। Baba Ramdev Ki Katha

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