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धनतेरस पूजा विधि || Dhanteras Puja Vidhi || Dhanteras Ki Puja Vidhi || Dhanteras Puja

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धनतेरस पूजा विधि || Dhanteras Puja Vidhi || Dhanteras Ki Puja Vidhi || Dhanteras Puja

उत्तरी भारत में कार्तिक कृ्ष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि के दिन धनतेरस का पर्व पूरी श्रद्धा व विश्वास से मनाया जाता है। धनवन्तरी के अलावा इस दिन, देवी लक्ष्मी और धन के देवता कुबेर की भी पूजा करने की मान्यता है। धनतेरस के दिन कुबेर के अलावा यमदेव को भी दीपदान किया जाता है। यमदेव की पूजा करने के विषय में एक मान्यता है कि इस दिन यमदेव की पूजा करने से घर में असमय मृ्त्यु का भय नहीं रहता है ।Dhanteras Puja पूरे विधि-विधान के साथ करने से सुख-समृद्धि व आरोग्य की प्राप्ति होती है । Online Specialist Astrologer Acharya Pandit Lalit Trivedi द्वारा बताये जा रहे धनतेरस पूजा विधि || Dhanteras Puja Vidhi || Dhanteras Ki Puja Vidhi || Dhanteras Puja को करके आप भी बहुत ही आसानी तरीखें से पूजा करके फायदा व् लाभ उठा सकते है !! जय श्री सीताराम !! जय श्री हनुमान !! जय श्री दुर्गा माँ !! जय श्री मेरे पूज्यनीय माता – पिता जी !! यदि आप अपनी कुंडली दिखा कर परामर्श लेना चाहते हो तो या किसी समस्या से निजात पाना चाहते हो तो कॉल करके या नीचे दिए लाइव चैट ( Live Chat ) से चैट करे साथ ही साथ यदि आप जन्मकुंडली, वर्षफल, या लाल किताब कुंडली भी बनवाने हेतु भी सम्पर्क करें Mobile & Whats app Number : 9667189678 Dhanteras Puja Vidhi By Online Specialist Astrologer Sri Hanuman Bhakt Acharya Pandit Lalit Trivedi.

धनतेरस पूजा विधि || Dhanteras Puja Vidhi || Dhanteras Ki Puja Vidhi

धनतेरस कब है || Dhanteras Kab Hai

कार्तिक मास के कृष्णपक्ष की त्रयोदशी को धनतेरस कहते हैं। इस साल Dhanteras Puja नवम्बर महीने के 13 तारीख वार शुक्रवार के दिन बनाया जायेगा !

धनतेरस पूजा का समय || Dhanteras Puja Ka Samay

प्रदोष काल मुहूर्त – 17:33 से 19:57 तक

Dhanteras Puja प्रदोष काल में करना शुभ रहता हैं। प्रदोष काल 2 घण्टे एवं 24 मिनट का होता हैं। अपने शहर के सूर्यास्त समय अवधि से लेकर अगले 2 घण्टे 24 मिनट कि समय अवधि को प्रदोष काल माना जाता हैं। अलग- अलग शहरों में प्रदोष काल के निर्धारण का आधार सूर्योस्त समय के अनुसार निर्धारीत करना चाहिये। धनतेरस के दिन प्रदोषकाल में दीपदान व लक्ष्मी पूजन करना शुभ रहता है।

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धनतेरस पूजा का शुभ मुहूर्त || Dhanteras Puja Ka Shubh Muhurat

धनतेरस पूजा मुहूर्त – 17:33 से 18:00 बजे तक !

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धनतेरस पूजा सामग्री || Dhanteras Puja Samagri

भगवान धन्वन्तरि की मूर्ति या चित्र, चावल, गंध, अबीर, गुलाल पुष्प, रोली, चांदी के पात्र, पान, लौंग, सुपारी, मौली |

धनतेरस पूजा कैसे करें || Dhanteras Puja Kaise Kare

Dhanteras Puja करने से पहले जातक को सर्वप्रथम नहाकर साफ वस्त्र धारण करें। भगवान धन्वन्तरि की मूर्ति या चित्र साफ स्थान पर स्थापित करें तथा स्वयं पूर्वाभिमुख होकर बैठ जाएं। उसके बाद भगवान धन्वन्तरि का आह्वान निम्न मंत्र से करें –

धनतेरस पूजा मंत्र || Dhanteras Puja Mantra

सत्यं च येन निरतं रोगं विधूतं, अन्वेषित च सविधिं आरोग्यमस्य।

गूढं निगूढं औषध्यरूपम्, धन्वन्तरिं च सततं प्रणमामि नित्यं।।

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इसके पश्चात पूजन स्थल पर आसन देने की भावना से चावल चढ़ाएं। इसके बाद आचमन के लिए जल छोड़े। भगवान धन्वन्तरि के चित्र पर गंध, अबीर, गुलाल पुष्प, रोली, आदि चढ़ाएं। चांदी के पात्र में खीर का नैवैद्य लगाएं। (अगर चांदी का पात्र उपलब्ध न हो तो अन्य पात्र में भी नैवेद्य लगा सकते हैं।) तत्पश्चात पुन: आचमन के लिए जल छोड़े। मुख शुद्धि के लिए पान, लौंग, सुपारी चढ़ाएं। भगवान धन्वन्तरि को वस्त्र (मौली) अर्पण करें। शंखपुष्पी, तुलसी, ब्राह्मी आदि पूजनीय औषधियां भी भगवान धन्वन्तरि को अर्पित करें। रोगनाश की कामना के लिए इस मंत्र का जाप करें-  

धनतेरस पूजा मंत्र || Dhanteras Puja Mantra

ऊँ रं रूद्र रोगनाशाय धन्वन्तर्ये फट् ||

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धनतेरस पर लक्ष्मी पुजा की विधि || Dhanteras Par Lakshmi Puja Vidhi

इस दिन शुभ मुहूर्त में पूजन करने के साथ-साथ सात धान्यों (गेंहूं, उडद, मूंग, चना, जौ, चावल और मसूर) की पूजा की जाती है। सात धान्यों के साथ ही पूजन सामग्री में विशेष रुप से स्वर्णपुष्पा के पुष्प से भगवती का पूजन करना लाभकारी रहता है। इस दिन Dhanteras Puja में भोग लगाने के लिये नैवेद्ध के रुप में श्वेत मिष्ठान का प्रयोग किया जाता है, इसके साथ ही इस दिन स्थिर लक्ष्मी की भी पूजा करने का विशेष महत्व है।

धनतेरस पर कुबेर पुजा की विधि || Dhanteras Par Kuber Puja Vidhi

शुभ मुहूर्त में धनतेरस के दिन धूप, दीप, नैवैद्ध से पूजन करने के बाद बताये गए निम्न मंत्र का जाप करें- इस Dhanteras Puja Mantra का जाप करने से भगवन धनवन्तरी बहुत खुश होते हैं, जिससे धन और वैभव की प्राप्ति होती है।

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यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धन-धान्य अधिपतये।

धन-धान्य समृद्धि मे देहि दापय स्वाहा।।

– पूजा करने के बाद घर के मुख्य द्वार पर दक्षिण दिशा की ओर मुख वाला दीपक जिसमें कुछ पैसा और कौड़ी डालकर पूरी रात्रि जलाना चाहिए।

– पुराणों में वर्णित कथा के अनुसार देवताओं व दैत्यों ने जब समुद्र मंथन किया तो उसमें से कई रत्‍‌न निकले। समुद्र मंथन के अंत में भगवान धन्वन्तरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए। उस दिन कार्तिक मास के कृष्णपक्ष की त्रयोदशी ही थी इसलिए तब से इस तिथि को भगवान धन्वन्तरि का प्रकटोत्सव मनाए जाने का चलन प्रारंभ हुआ।

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