श्री हयग्रीव स्तोत्रम् || Sri Hayagreeva Stotram || Hayagriva Stotram

श्री हयग्रीव स्तोत्रम्, Sri Hayagreeva Stotram, Sri Hayagreeva Stotram Ke Fayde, Sri Hayagreeva Stotram Ke Labh, Sri Hayagreeva Stotram Benefits, Sri Hayagreeva Stotram Pdf, Sri Hayagreeva Stotram Mp3 Download, Sri Hayagreeva Stotram Lyrics. 

10 वर्ष के उपाय के साथ अपनी लाल किताब की जन्मपत्री ( Lal Kitab Horoscope  ) बनवाए केवल 500/- ( Only India Charges  ) में ! Mobile & Whats app Number : +91-9667189678

नोट : यदि आप अपने जीवन में किसी कारण से परेशान चल रहे हो तो ज्योतिषी सलाह लेने के लिए अभी ज्योतिष आचार्य पंडित ललित त्रिवेदी पर कॉल करके अपनी समस्या का निवारण कीजिये ! +91- 9667189678 ( Paid Services )

30 साल के फ़लादेश के साथ वैदिक जन्मकुंडली बनवाये केवल 500/- ( Only India Charges  ) में ! Mobile & Whats app Number : +91-9667189678

श्री हयग्रीव स्तोत्रम् || Sri Hayagreeva Stotram || Hayagriva Stotram

श्री हयग्रीव स्तोत्रम् के रचियता संत श्री वेंकटेशिका जी ने की हैं ! हायाग्रिवा में हया का मतलब है घोड़े और ग्रिवा का अर्थ है गर्दन ! यंहा घोड़े को भगवान श्री विष्णु जी के रूप का सामना करना पड़ता हैं ! राक्षस मधु और काइताभा ने ब्रह्मा से वेदों को चुरा लिया था उसे वापस लाने के लिए भगवान श्री विष्णु जी को हयग्रीव का अवतार लेना पडा ! Sri Hayagreeva Stotram का जो भी व्यक्ति नियमित रूप से पाठ करता है उसकी बुद्दि तेज़ व् तीव्र हो जाती हैं ! Sri Hayagreeva Stotram के बारे में बताने जा रहे हैं !! जय श्री सीताराम !! जय श्री हनुमान !! जय श्री दुर्गा माँ !! यदि आप अपनी कुंडली दिखा कर परामर्श लेना चाहते हो तो या किसी समस्या से निजात पाना चाहते हो तो कॉल करके या नीचे दिए लाइव चैट ( Live Chat ) से चैट करे साथ ही साथ यदि आप जन्मकुंडली, वर्षफल, या लाल किताब कुंडली भी बनवाने हेतु भी सम्पर्क करें : 9667189678 Sri Hayagreeva Stotram By Online Specialist Astrologer Acharya Pandit Lalit Trivedi.

श्री हयग्रीव स्तोत्रम् || Sri Hayagreeva Stotram

श्रीमान् वेङ्कटनाथार्यः कवितार्किककेसरी । वेदान्ताचार्यवर्यो मे सन्निधत्तां सदा हृदि ॥

ज्ञानानन्द मयं देवं निर्मलस्फटिकाकृतिम् । आधारं सर्व विद्यानां हयग्रीवम् उपास्महे ॥ १ ॥

स्वतस्सिद्धं शुद्धस्फटिकमणि भूभृत्प्रतिभटं । सुधा सध्रीचीभिर् धुतिभिर् अवदातत्रिभुवनम् ।

अनन्तैस्त्रय्यन्तैर् अनुविहित हेषा हलहलं । हताशेषावद्यं हयवदन मीडी महि महः ॥ २ ॥

समाहारस्साम्नां प्रतिपदमृचां धाम यजुषां । लयः प्रत्यूहानां लहरि विततिर्बोधजलधेः ।

कथा दर्पक्षुभ्यत् कथककुल कोलाहलभवं । हरत्वन्तर्ध्वान्तं हयवदन हेषा हलहलः ॥ ३ ॥

प्राची सन्ध्या काचिदन्तर् निशायाः । प्रज्ञादृष्टेरञ्जन श्रीरपूर्वा ।

वक्त्री वेदान् भातु मे वाजि वक्त्रा । वागीशाख्या वासुदेवस्य मूर्तिः ॥ ४ ॥

विशुद्ध विज्ञान घन स्वरूपं । विज्ञान विश्राणन बद्ध दीक्षम् ।

दयानिधिं देहभृतां शरण्यं । देवं हयग्रीवम् अहं प्रपद्ये ॥ ५ ॥

अपौरुषेयैर् अपि वाक्प्रपञ्चैः । अद्यापि ते भूति मदृष्ट पाराम् ।

स्तुवन्नहं मुग्ध इति त्वयैव । कारुण्यतो नाथ कटाक्षणीयः ॥ ६ ॥

दाक्षिण्य रम्या गिरिशस्य मूर्तिः । देवी सरोजासन धर्मपत्नी ।

व्यासादयोऽपि व्यपदेश्य वाचः । स्फुरन्ति सर्वे तव शक्ति लेशैः ॥ ७ ॥

मन्दोऽभविष्यन् नियतं विरिञ्चो । वाचां निधे वञ्चित भाग धेयः । 

दैत्यापनीतान् दययैव भूयोऽपि । अध्यापयिष्यो निगमान् न चेत् त्वम् ॥ ८ ॥

सरल  ज्योतिष उपाय के लिए हमारे Youtube चेनल को Subscriber करें : Click Here

वितर्क डोलां व्यवधूय सत्वे । बृहस्पतिं वर्तयसे यतस्त्वम् ।

तेनैव देव त्रिदशेश्वराणाम् । अस्पृष्ट डोलायित माधिराज्यम् ॥ ९ ॥

अग्नोउ समिद्धार्चिषि सप्ततन्तोः । आतस्थिवान् मन्त्रमयं शरीरम् ।

अखण्ड सारैर् हविषां प्रदानैः । आप्यायनं व्योम सदां विधत्से ॥ १० ॥

यन्मूलमीदृक् प्रतिभाति तत्वं । या मूलमाम्नाय महाद्रुमाणाम् ।

तत्वेन जानन्ति विशुद्ध सत्वाः । त्वाम् अक्षराम् अक्षर मातृकां ते ॥ ११ ॥

अव्याकृताद् व्याकृत वानसि त्वं । नामानि रूपाणि च यानि पूर्वम् ।

शंसन्ति तेषां चरमां प्रतिष्टां । वागीश्वर त्वां त्वदुपज्ञ वाचः ॥ १२ ॥

मुग्धेन्दु निष्यन्द विलोभ नीयां । मूर्तिं तवानन्द सुधा प्रसूतिम् । 

विपश्चितश्चेतसि भावयन्ते । वेला मुदारामिव दुग्ध सिन्धोः ॥ १३ ॥

मनोगतं पश्यति यः सदा त्वां । मनीषिणां मानस राज हंसम् ।

स्वयं पुरोभाव विवादभाजः । किंकुर्वते तस्य गिरो यथार्हम् ॥ १४ ॥

अपि क्षणार्धं कलयन्ति ये त्वां । आप्लावयन्तं विशदैर् मयूखैः । 

वाचां प्रवाहैर् अनिवारितैस्ते । मन्दाकिनीं मन्दयितुं क्षमन्ते ॥ १५ ॥ 

स्वामिन् भवद्ध्यान सुधाभिषेकात् । वहन्ति धन्याः पुलकानुबन्धम् ।

अलक्षिते क्वापि निरूढ मूलं । अङ्गेष्विवानन्दथुम् अङ्कुरन्तम् ॥ १६ ॥

स्वामिन् प्रतीचा हृदयेन धन्याः । त्वद्ध्यान चन्द्रोदय वर्धमानम् ।

अमान्त मानन्द पयोधिमन्तः । पयोभिरक्ष्णां परिवाहयन्ति ॥ १७ ॥

सरल  ज्योतिष उपाय के लिए हमारे Youtube चेनल को Subscriber करें : Click Here

स्वैरानुभावास् त्वदधीन भावाः । समृद्ध वीर्यास् त्वदनुग्रहेण ।

विपश्चितो नाथ तरन्ति मायां । वैहारिकीं मोहन पिञ्छिकां ते ॥ १८ ॥

प्राङ् निर्मितानां तपसां विपाकाः । प्रत्यग्र निश्श्रेयस संपदो मे ।

समेधिषीरंस्तव पाद पद्मे । संकल्प चिन्तामणयः प्रणामाः ॥ १९ ॥

विलुप्त मूर्धन्य लिपिक्र माणां । सुरेन्द्र चूडापद लालितानाम् ।

त्वदंघ्रि राजीव रजः कणानां । भूयान् प्रसादो मयि नाथ भूयात् ॥ २० ॥

परिस्फुरन् नूपुर चित्रभानु । प्रकाश निर्धूत तमोनुषङ्गाम् ।

पदद्वयीं ते परिचिन् महेऽन्तः । प्रबोध राजीव विभात सन्ध्याम् ॥ २१ ॥

त्वत् किङ्करा लंकरणो चितानां । त्वयैव कल्पान्तर पालितानाम् ।

मञ्जुप्रणादं मणिनूपुरं ते । मञ्जूषिकां वेद गिरां प्रतीमः ॥ २२ ॥

संचिन्तयामि प्रतिभाद शास्थान् । संधुक्षयन्तं समय प्रदीपान् ।

विज्ञान कल्पद्रुम पल्लवाभं । व्याख्यान मुद्रा मधुरं करं ते ॥ २३ ॥

चित्ते करोमि स्फुरिताक्षमालं । सव्येतरं नाथ करं त्वदीयम् ।

ज्ञानामृतो दञ्चन लम्पटानां । लीला घटी यन्त्र मिवाश्रितानाम् ॥ २४ ॥

प्रबोध सिन्धोररुणैः प्रकाशैः । प्रवाल सङ्घात मिवोद्वहन्तम् ।

विभावये देव सपुस्तकं ते । वामं करं दक्षिणम् आश्रितानाम् ॥ २५ ॥

सरल  ज्योतिष उपाय के लिए हमारे Youtube चेनल को Subscriber करें : Click Here

तमांसि भित्वा विशदैर्मयूखैः । संप्रीणयन्तं विदुषश्चकोरान् ।

निशामये त्वां नव पुण्डरीके । शरद्घने चन्द्रमिव स्फुरन्तम् ॥ २६ ॥

दिशन्तु मे देव सदा त्वदीयाः । दया तरङ्गानुचराः कटाक्षाः ।

श्रोत्रेषु पुंसाम् अमृतं क्षरन्तीं । सरस्वतीं संश्रित कामधेनुम् ॥ २७ ॥

विशेष वित्पारिष देषु नाथ । विदग्ध गोष्ठी समराङ्गणेषु ।

जिगीषतो मे कवितार्कि केन्द्रान् । जिह्वाग्र सिंहासनम् अभ्युपेयाः ॥ २८ ॥

त्वां चिन्तयन् त्वन्मयतां प्रपन्नः । त्वामुद्गृणन् शब्द मयेन धाम्ना ।

स्वामिन् समाजेषु समेधिषीय । स्वच्छन्द वादाहव बद्ध शूरः ॥ २९ ॥

नाना विधानामगतिः कलानां । न चापि तीर्थेषु कृतावतारः ।

ध्रुवं तवानाथ परिग्रहायाः । नवं नवं पात्रमहं दयायाः ॥ ३० ॥

अकम्पनीयान् यपनीति भेदैः । अलंकृषीरन् हृदयं मदीयम् ।

शङ्का कलङ्का पगमोज्ज्वलानि । तत्वानि सम्यञ्चि तव प्रसादात् ॥ ३१ ॥

व्याख्या मुद्रां करसरसिजैः पुस्तकं शङ्क चक्रे । बिभ्रद् भिन्नस्फटिक रुचिरे पुण्डरीके निषण्णः । 

अम्लानश्रीर् अमृत विशदैर् अंशुभिः प्लावयन् मां । आविर्भूया दनघ महिमा मानसे वाग धीशः ॥ ३२ ॥

वागर्थ सिद्धिहेतोः । पठत हयग्रीव संस्तुतिं भक्त्या ।

कवितार्किक केसरिणा । वेङ्कट नाथेन विरचिता मेताम् ॥ ३३ ॥

 ॥ इति श्रीहयग्रीवस्तोत्रं समाप्तम् ॥

कवितार्किकसिंहाय कल्याणगुणशालिने । श्रीमते वेङ्कटेशाय वेदान्तगुरवे नमः ॥

10 वर्ष के उपाय के साथ अपनी लाल किताब की जन्मपत्री ( Lal Kitab Horoscope  ) बनवाए केवल 500/- ( Only India Charges  ) में ! Mobile & Whats app Number : +91-9667189678

<<< पिछला पेज पढ़ें                                                                                                                      अगला पेज पढ़ें >>>


यदि आप अपने जीवन में किसी कारण से परेशान चल रहे हो तो ज्योतिषी सलाह लेने के लिए अभी ज्योतिष आचार्य पंडित ललित त्रिवेदी पर कॉल करके अपनी समस्या का निवारण कीजिये ! +91- 9667189678 ( Paid Services )

यह पोस्ट आपको कैसी लगी Star Rating दे कर हमें जरुर बताये साथ में कमेंट करके अपनी राय जरुर लिखें धन्यवाद : Click Here

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *