हयग्रीव अवतार की कथा || Hayagriva Avtar Ki Katha || Hayagreeva Avtar Ki Katha

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हयग्रीव अवतार की कथा || Hayagriva Avtar Ki Katha || Hayagreeva Avtar Ki Katha

श्री हयग्रीव जंयती कब हैं ? 2020 || Shri Hayagriva Jayanti Kab Hai 2020 

इस साल श्री हयग्रीव जंयती 03 अगस्त, वार सोमवार के दिन मनाई जाएगी !

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हयग्रीव अवतार की कथा || Hayagriva Avtar Ki Katha || Hayagreeva Avtar Ki Katha

एक समय की बात है क‌ि भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी बैकुण्ठ में विराजमान थे। उस समय देवी लक्ष्मी के सुंदर रूप को देखकर भगवान विष्णु मुस्कुराने लगे। देवी लक्ष्मी को ऐसा लगा कि विष्णु भगवान उनके सौन्दर्य की हंसी उड़ा रहे हैं। देवी ने इसे अपना अपमान समझ लिया और ब‌िना सोचे भगवान विष्णु को शाप दे दिया कि आपका सिर धड़ से अलग हो जाए। Hayagriva Avtar Ki Katha

शाप का परिणाम यह हुआ कि एक बार भगवान विष्णु युद्ध करते हुए बहुत थक गए तो धनुष की प्रत्यंचा चढ़ाकर उसे धरती पर टिका दिया और उस पर सिर लगाकर सो गए। कुछ समय बाद जब देवाताओं ने यज्ञ का आयोजन किया तो भगवान विष्णु को निद्रा से जगाने के लिए धनुष की प्रत्यंचा कटवा दिया। प्रत्यंचा कटते ही उसने भगवान विष्णु के गर्दन पर प्रहार हुआ और भगवान का सिर धड़ से अलग हो गया।

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इसके बाद आदिशक्ति का देवताओं ने आह्वान किया। देवी ने बताया कि आप भगवान विष्णु के धड़ में घोड़े का सिर लगवा दें। देवताओं ने विश्वकर्मा के सहयोग से भगवान विष्णु के धड़ में घोड़े का सिर जोड़ दिया और यह अवतार हयग्रीव अवतार कहलाया। Hayagriva Avtar Ki Katha

दरअसल देवी लक्ष्मी का शाप और इस अवतार के पीछे भगवान व‌िष्‍णु की ही माया थी क्योंक‌ि इस अवतार के जर‌िए भगवान व‌िष्‍णु को एक बड़ा काम करना था।

इस अवतार में भगवान विष्णु ने हयग्रीव नाम के ही एक दैत्य का वध किया जिसे देवी से यह वरदान प्राप्त हुआ था कि उसकी मृत्यु केवल उसी व्यक्ति के हाथों से हो सकती है जिसका सिर घोड़े का हो और शरीर मनुष्य का। इस तरह भगवान विष्णु का यह अवतार लेना सफल हुआ। भगवान व‌िष्‍णु ने इस अवतार को लेकर हयग्रीव से वेदों को वापस लेकर ब्रह्मा जी को सौंपा। Hayagriva Avtar Ki Katha

हयग्रिव विष्णु का एक बहुत ही दुर्लभ घोड़ा मस्तक अवतार है| यह अवतार एक समय में हुआ जब राक्षसों ने वेदों द्वारा प्रतिनिधित्व किये जाने वाले ज्ञान चुरा लिया। हयग्रिव राक्षसों से वेदों को बहाल करने के लिए अवतारित किया। हयग्रिव पुनर्स्थापक का प्रतिनिधित्व करता है जो अज्ञानता के झुंड से ज्ञान बहाल करता है|

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देवी सरस्वती के गुरु के रूप में, कला और विज्ञान के दिव्य संरक्षक, विष्णु के इस घोड़े के मस्तक अवतार बुद्धी और ज्ञान के सभी रूपों पर शासन करते हैं| पवित्र ग्रंथों के अनुसार, विष्णु ने अपने हयग्रीव रूप में पवित्र वैदिक मंत्रों को संकलित किया, जिसका पाठ अभी भी वैदिक अग्नि प्रार्थनाओं (यज्ञ) के अभिन्न अंग हैं। यही कारण है कि पवित्र और सांसारिक विषयों दोनों के अध्ययन शुरू करने से पहले हयग्रिव के आशीर्वाद मांगा जाता है | Hayagriva Avtar Ki Katha

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