चातुर्मास व्रत विधि || Chaturmas Vrat Vidhi || Chaturmas Ka Mahatva

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चातुर्मास व्रत विधि || Chaturmas Vrat Vidhi || Chaturmas Ka Mahatva

हम यंहा आपको इस पोस्ट के माध्यम से चातुर्मास का महत्व और व्रत विधि के बारे में जानकारी देने जा रहे हैं ! हमारे इस पोस्ट के  माध्यम से आप चातुर्मास के बारे में अधिक जानकारी प्राप्त कर सकेंगे ! Online Specialist Astrologer Acharya Pandit Lalit Trivedi द्वारा बताये जा रहे चातुर्मास व्रत विधि || Chaturmas Vrat Vidhi || Chaturmas Ka Mahatva को पढ़कर आप भी चातुर्मास का महत्व और व्रत विधि के बारे में अधिक से अधिक जान सकोंगे !! जय श्री सीताराम !! जय श्री हनुमान !! जय श्री दुर्गा माँ !! जय श्री मेरे पूज्यनीय माता – पिता जी !! यदि आप अपनी कुंडली दिखा कर परामर्श लेना चाहते हो तो या किसी समस्या से निजात पाना चाहते हो तो कॉल करके या नीचे दिए लाइव चैट ( Live Chat ) से चैट करे साथ ही साथ यदि आप जन्मकुंडली, वर्षफल, या लाल किताब कुंडली भी बनवाने हेतु भी सम्पर्क करें Mobile & Whats app Number : 9667189678 Chaturmas Vrat Vidhi By Online Specialist Astrologer Acharya Pandit Lalit Trivedi.

चातुर्मास व्रत विधि || Chaturmas Vrat Vidhi || Chaturmas Ka Mahatva

चातुर्मास कब से है || Chaturmas Vrat Kab Se Hai

आषाढ माह की शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि से कार्तिक माह की शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि तक अथवा आषाढ माह की पूर्णिमा से कार्तिक माह पूर्णिमा तक चार महीने के समय को “चातुर्मास” कहा जाता है ! जो की साल 2019 में 11 जुलाई से 8 नवम्बर, 2019 तक रहेगा !

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चातुर्मास का महत्व || Chaturmas Vrat Ka Mahatva

चातुर्मास का महत्व इसलिए ज्यादा बढ़ जाता है क्योंकी कहते है की चातुर्मास को उपासना एवं साधना करने से जातक को और समय की तुलना में ज्यादा पुण्यकारक एवं फलदायी देती है ! हिन्दू धर्म के अनुसार ऐसी मान्यता है कि चातुर्मास का समय देवताओं के शयन काल का होता है ! इसलिए इस समय में हिन्दू धर्म के कोई भी मांगलिक कार्य नही होते है ! और इसलिए ही चातुर्मास के आरंभ में जो भी एकादशी आती है, उसे शयनी अथवा “देवशयनी एकादशी” कहते हैं ! मतलब देवताओं की शयन काल का समय ! तथा चातुर्मास के समापन पर जो एकादशी आती है, उसे देवोत्थानी अथवा प्रबोधिनी एकादशी कहते हैं ! मतलब देवताओं के उठने का समय ! 

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चातुर्मास व्रत विधि || Chaturmas Vrat Vidhi

चातुर्मास के काल को व्रत विधियों का भी समय माना जाता है ! धार्मिक व् आध्यात्मिक दृष्टिकोण से देखें, तो चातुर्मास में पृथ्वी के वातावरण में तमोगुण की प्रबलता कुछ ज्यादा ही बढ जाती है ! इसलिए इसे समय में हमें हमारी सात्त्विकता बढाना आवश्यक होता है ! इसलिए चातुर्मास में किए जाने वाले उपवास व् व्रत विधियों द्वारा देवताओं की उपासना व् आवाहन करके सत्त्वगुण को बढ़ाना चाहिए ! चातुर्मास में व्रत रखने के बहुत लाभ मिलते है ! 

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