माँ तारा देवी मंत्र || Maa Tara Devi Mantra || Goddess Tara Devi Mantra

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माँ तारा देवी मंत्र || Maa Tara Devi Mantra

आज हम आपको Maa Tara Devi Mantra के बारे में बताने जा रहे हैं ! यह तो आप सब जानते है की दस महाविद्याओं में दुसरे स्थान पर तारा साधना मानी जाती हैं ! इस साधना को आप चैत्र व् आश्विन नवरात्रि में या गुप्त नवरात्रि में कर सकते है ! Maa Tara Devi Mantra साधना महाविद्यायों में द्वितीय स्थान पर विद्यमान, महाविद्या तारा, मोक्ष दात्री एवं सर्व ज्ञान संपन्न ! Maa Tara Devi Mantra साधना माँ श्री दुर्गा जी का द्वितीय उग्र रूप है !! Online Specialist Astrologer Acharya Pandit Lalit Trivedi द्वारा बताये जा रहे माँ तारा देवी मंत्र || Maa Tara Devi Mantra || Goddess Tara Devi Mantra को जानकर आप भी महाविद्या तारा साधना पूरी कर सकते हैं !! जय श्री सीताराम !! जय श्री हनुमान !! जय श्री दुर्गा माँ !! जय श्री मेरे पूज्यनीय माता – पिता जी !! यदि आप अपनी कुंडली दिखा कर परामर्श लेना चाहते हो तो या किसी समस्या से निजात पाना चाहते हो तो कॉल करके या नीचे दिए लाइव चैट ( Live Chat ) से चैट करे साथ ही साथ यदि आप जन्मकुंडली, वर्षफल, या लाल किताब कुंडली भी बनवाने हेतु भी सम्पर्क करें Mobile & Whats app Number : 9667189678 Maa Tara Devi Mantra By Online Specialist Astrologer Acharya Pandit Lalit Trivedi.

माँ तारा देवी मंत्र || Maa Tara Devi Mantra

देवी तारा अपने मुख्य तीन स्वरूप से विख्यात हैं, उग्र तारा, नील सरस्वती तथा एक-जटा । प्रथम ‘उग्र तारा’, अपने उग्र तथा भयानक रूप हेतु जानी जाती हैं। देवी का यह स्वरूप अत्यंत उग्र तथा भयानक हैं, ज्वलंत चिता के ऊपर, शव रूपी शिव या चेतना हीन शिव के ऊपर, देवी प्रत्यालीढ़ मुद्रा में खड़ी हैं। देवी उग्र तारा, तमो गुण सम्पन्न हैं तथा अपने साधकों-भक्तों के कठिन से कठिन परिस्थितियों में पथ प्रदर्शित तथा छुटकारा पाने में सहायता करती हैं।

द्वितीय ‘नील सरस्वती, इस स्वरूप में देवी संपूर्ण ब्रह्माण्ड के समस्त ज्ञान कि ज्ञाता हैं। सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड में जो भी ज्ञान इधर-उधर बिखरा हुआ पड़ा हैं, उन सब को एकत्रित करने पर जिस ज्ञान की उत्पत्ति होती हैं, वे ये देवी नील सरस्वती ही हैं। इस स्वरूप में देवी राजसिक या रजो गुण सम्पन्न हैं। देवी परम ज्ञानी हैं, अपने असाधारण ज्ञान के परिणाम स्वरूप, ज्वलंत चिता के शव को शिव स्वरूप में परिवर्तित करने में समर्थ हैं।

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एकजटा, यह देवी का तीसरे स्वरूप या नाम हैं, पिंगल जटा जुट वाली यह देवी सत्व गुण सम्पन्न हैं तथा अपने भक्त को मोक्ष प्रदान करती हैं मोक्ष दात्री हैं। ज्वलंत चिता में सर्वप्रथम देवी, उग्र तारा के रूप में खड़ी हैं, द्वितीय नील सरस्वती, शव को जीवित कर शिव बनाने में सक्षम हैं तथा तीसरे स्वरूप में देवी एकजटा जीवित शिव को अपने पिंगल जटा में धारण करती हैं या मोक्ष प्रदान करती हैं। देवी अपने भक्तों को मृत्युपरांत, अपनी जटाओं में विराजित अक्षोभ्य शिव के साथ स्थान प्रदान करती हैं या कहे तो मोक्ष प्रदान करती हैं ।

देवी अन्य आठ स्वरूपों में ‘अष्ट तारा’ समूह का निर्माण करती है तथा विख्यात हैं,

१. तारा

२. उग्र तारा

३. महोग्र तारा

४. वज्र तारा

५. नील तारा

६. सरस्वती

७. कामेश्वरी

८. भद्र काली-चामुंडा ।

मुख्य नाम : तारा।

अन्य नाम : उग्र तारा, नील सरस्वती, एकजटा।

भैरव : अक्षोभ्य शिव, बिना किसी क्षोभ के हलाहल विष का पान करने वाले।

भगवान विष्णु के २४ अवतारों से सम्बद्ध : भगवान राम।

कुल : काली कुल।

दिशा : ऊपर की ओर।

स्वभाव : सौम्य उग्र, तामसी गुण सम्पन्न।

वाहन : गीदड़।

सम्बंधित तीर्थ स्थान या मंदिर : तारापीठ, रामपुरहाट, बीरभूम, पश्चिम बंगाल, भारत; सुघंधा, बांग्लादेश तथा सासाराम, बिहार, भारत।

कार्य : मोक्ष दात्री, भव-सागर से तारने वाली, जन्म तथा मृत्यु रूपी चक्र से मुक्त करने वाली।

शारीरिक वर्ण : नीला।

लक्ष्मी, सरस्वती, रति, प्रीति, कीर्ति, शांति, तुष्टि, पुष्टि रूपी आठ शक्तियां नील सरस्वती की पीठ शक्ति मानी जाती हैं, देवी का वाहन शव हैं। 

१. देवी तारा मंत्र : Beej Tara Devi Mantra : 

ॐ ह्रीं स्त्रीं हुं फट

२. देवी एक्जता मंत्र : 

ह्रीं त्री हुं फट

३.नील सरस्वती मंत्र :

ह्रीं त्री हुं

शत्रु नाशक मंत्र : Shatru Nashak Tara Devi Mantra :

ऐं ह्रीं श्रीं क्लीं सौ: हुं उग्रतारे फट

जादू टोना नाशक मंत्र : Jadu Tona Nashak Tara Devi Mantra : 

ॐ हुं ह्रीं क्लीं सौ: हुं फट 

सुरक्षा कवच का मंत्र : Surkasha Kavach Tara Devi Mantra : 

ॐ हुं ह्रीं हुं ह्रीं फट

सभी स्वरूप गुण तथा स्वभाव से भिन्न-भिन्न है तथा भक्तों की समस्त प्रकार के मनोकामनाओं को पूर्ण करने में समर्थ, सक्षम हैं । 

नोट : महाविद्या Tara Devi Mantra Sadhana आप बिना गुरु बनाये ना करें गुरु बनाकर व अपने गुरु से सलाह लेकर इस साधना को करना चाहिए ! क्युकी बिना गुरु के की हुई साधना आपके जीवन में हानि ला सकती है ! 

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