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द्वादशनाम पञ्जर || Dwadasa Nama Panjaram

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द्वादशनाम पञ्जर || Dwadasa Nama Panjaram

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द्वादशनाम पञ्जर || Dwadasa Nama Panjaram

पुरस्तात् केशवः पातु चक्री जाम्बूनदप्रभः ।

पश्चान्नारायणः शङ्खी नीलजीमूतसन्निभः ॥ १ ॥

इन्दीवरदलश्यामो माधवोर्ध्वं गदाधरः ।

गोविन्दो दक्षिणे पार्श्वे धन्वी चन्द्रप्रभो महान् ॥ २ ॥

उत्तरे हलभृद्विष्णुः पद्मकिञ्जल्कसन्निभः ।

आग्नेय्यामरविन्दाभो मुसली मधुसूदनः ॥ ३ ॥

त्रिविक्रमः खड्गपाणिः नि‌ऋत्यां ज्वलनप्रभः ।

वायव्यां वामनो वज्री तरुणादित्यदीप्तिमान् ॥ ४ ॥

एशान्यां पुण्डरीकाभः श्रीधरः पट्टसायुधः ।

विद्युत्प्रभो हृषीकेशः स बाह्यान् दिशि मुद्गरी ॥ ५ ॥

हृत्पद्मे पद्मनाभो मे सहस्रार्कसमप्रभः ।

सर्वायुधः सर्वशक्तिः सर्वज्ञः सर्वतोमुखः ॥ ६ ॥

इन्द्रगोपकसङ्काशः पाशहस्तोऽपराजितः ।

स बाह्याभ्यन्तरं देहं व्याप्य दामोदर स्थितः ॥ ७ ॥

एवं सर्वत्रमच्छिद्रं नामद्वादशपञ्जरम ।

प्रविष्टोऽहं न मे किञ्चिद्भयमस्ति कदाचन ॥ ८ ॥

 भयन्नास्ति कदाचन ओं नम इति ।

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